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Education Policy 2020: स्कूलों में 10+2 सिस्टम खत्म, जानिए क्या है 5+3+3+4 की नई व्यवस्था

नई दिल्ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि 34 साल बाद किसी सरकार ने शिक्षा नीति में बदलाव किया है। नई शिक्षा नीति में पहले से चली आ रही स्कूली पाठ्यक्रम 10+2 के फॉर्मेट को खत्म कर दिया गया है। अब देश में 5+ 3+ 3+ 4 के हिसाब से स्कूली पाठ्यक्रम तय किया जाएगा।
New education policy in India 2020 (5 + 3 + 3 + 4)

पांच साल की पढ़ाई के लिए अलग पाठ्यक्रम

इसका मतलब है कि पहले तीन साल बच्चे आंगनबाड़ी में प्री-स्कूलिंग शिक्षा लेंगे। उसके बाद अगले दो साल, कक्षा 1 और कक्षा 2 में बच्चों को स्कूल में पढ़ाया जाएगा। फिर अगले तीन साल को कक्षा 3 से 5 की तैयारी के चरण में विभाजित किया जाएगा। इस पांच साल की पढ़ाई के लिए एक अलग पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा। ऐसे समझें-

अलग-अलग उम्र में विषयों का चुनाव

प्रीप्रेटरी स्टेज- इस चरण में कक्षा तीन से पांचवीं तक की पढ़ाई को कवर किया जाएगा। इस दौरान बच्चों को विज्ञान, गणित, कला आदि की पढ़ाई कराई जाएगी। इस पाठ्यक्रम को 8 से 11 साल की उम्र के बच्चों को पढ़ाया जाएगा।

मिडिल स्टेज- इसमें 11-14 साल की उम्र के बच्चों को कवर किया जाएगा। जो 6-8 की कक्षाओं की पढ़ाई करेंगे। इन कक्षाओं में विषय आधारित पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा।
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सेकेंडरी स्टेज- इस चरण में कक्षा नौ से 12 की पढ़ाई दो चरणों में होगी जिसमें विषयों को चुनने की आजादी भी होगी। साथ ही पाठ्यक्रम का गहन अध्ययन भी कराया जाएगा। बता दें कि पहले कक्षा एक से 10 तक सामान्य पढ़ाई होती थी। उसके बाद 10+2 यानी सीनियर सेकेंडरी कक्षा में आने के बाद विषयों को चुनने की आजादी थी।

 

नई शिक्षा नीति 2020 का क्या है उद्देश्य?

मोदी मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गई नई शिक्षा नीति के घोषित उद्देश्यों में से एक है भारतीय होने में गर्व पैदा करना है। इसका लक्ष्य न केवल विचारों में, बल्कि आत्मा, बुद्धि और कर्मों के साथ ज्ञान, कौशल, मूल्यों और प्रस्तावों को भी विकसित करना है। यह मानवाधिकारों, स्थायी विकास और जीवन यापन और वैश्विक कल्याण के लिए जिम्मेदार प्रतिबद्धता का समर्थन करता है।

HRD मंत्रालय का बदला नाम

बता दें कि नई शिक्षा नीति 2020 के मसौदा नीति ने यह भी सुझाव दिया है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय को शिक्षा मंत्रालय के रूप में फिर से रजिस्टर्ड किया जाना चाहिए। मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक का कहना है कि नई शिक्षा नीति के बाद युवाओं के लिए उच्चतर शिक्षा हासिल करना पहले की तुलना में आसान हो जाएगा। उनके मुताबिक नई शिक्षा नीति में क्षेत्र से जुड़े कई मुद्दों को हल कर लिया गया है।

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